अध्याय 1: जंगल का सबसे छोटा हाथी
दूर, बहुत दूर, घने जंगलों के बीच, एक हाथियों का झुंड रहता था। यह झुंड बहुत बड़ा था और इसमें कई मजबूत और बड़े हाथी थे। लेकिन उसी झुंड में एक छोटा सा, नटखट और चंचल हाथी भी था—जिसका नाम था मुन्ना।
मुन्ना बाकी हाथियों से छोटा था, पर उसकी आँखों में हमेशा शरारत चमकती रहती थी। वह हर किसी से दोस्ती करना चाहता था—तोते से, खरगोश से, हिरण से और यहाँ तक कि नदियों में तैरती छोटी-छोटी मछलियों से भी। पर बड़े हाथी उसे हमेशा टोकते, “मुन्ना, तुम बहुत छोटे हो, जंगल में सतर्क रहना सीखो!”
लेकिन मुन्ना को यह बातें समझ नहीं आतीं। वह बस उछल-कूद करता और खेलता रहता।
अध्याय 2: मुन्ना की शरारतें
एक दिन मुन्ना ने सोचा, “आज मैं कुछ नया करूंगा!” वह नदी किनारे गया और वहाँ पानी के छींटे उड़ाने लगा। अचानक उसने देखा कि एक नन्हा बंदर, जिसका नाम चिंकी था, पास के पेड़ से नीचे उतर रहा है।
मुन्ना ने मज़ाक में अपनी सूंड से पानी उछाला और चिंकी पूरा भीग गया! चिंकी गुस्से से बोला, “मुन्ना! यह क्या किया तुमने?”
“अरे चिंकी भाई, गुस्सा मत हो! गर्मी बहुत है, मैंने तुम्हें बस ठंडा कर दिया!” मुन्ना हंसते हुए बोला।
चिंकी पहले नाराज हुआ, लेकिन फिर दोनों खूब हंसे और खेलने लगे।
अध्याय 3: खतरे की घंटी
उसी रात, जब पूरा जंगल सो रहा था, तब एक परछाईं चुपचाप जंगल में दाखिल हुई। यह थी बब्बर नाम का शिकारी। वह हाथियों का शिकार करने आया था!
सुबह होते ही जंगल में हड़कंप मच गया। बड़े हाथियों ने शिकारी की गंध सूंघ ली और सतर्क हो गए। उन्होंने छोटे जानवरों को आगाह किया, “सब लोग छिप जाओ, शिकारी आया है!”
मुन्ना ने यह सुना तो वह भी डर गया। पर तभी उसने देखा कि चिंकी और कुछ छोटे जानवर परेशान थे।
“क्या हुआ चिंकी?” मुन्ना ने पूछा।
“मुन्ना, शिकारी ने जंगल के किनारे जाल बिछा दिया है। हमारा दोस्त छोटू हिरण उसमें फंस गया है!” चिंकी बोला।
अध्याय 4: मुन्ना की बहादुरी
अब मुन्ना को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे। वह भागता हुआ अपनी माँ के पास गया और कहा, “माँ, छोटू हिरण जाल में फंस गया है, हमें कुछ करना होगा!”
मुन्ना की माँ ने गंभीर स्वर में कहा, “मुन्ना, यह बहुत खतरनाक है। शिकारी के पास तेज हथियार हैं।”
लेकिन मुन्ना हार मानने को तैयार नहीं था। उसने सोचा, “अगर मैं छोटे जानवरों की मदद नहीं करूंगा, तो दोस्ती किस काम की?”
उसने एक तरकीब सोची। मुन्ना जंगल में भागा और उसने बड़े हाथियों से मदद मांगी। सभी हाथी इकट्ठे हुए और शिकारी की ओर बढ़े।
अध्याय 5: शिकारी का सबक
जब शिकारी ने देखा कि पूरा झुंड उसकी ओर बढ़ रहा है, तो वह घबरा गया। वह अपने जाल से छोटे हिरण को पकड़ने ही वाला था कि मुन्ना ने अपनी पूरी ताकत से उसकी ओर पानी का तेज़ फव्वारा फेंका। शिकारी घबराकर पीछे हट गया।
फिर बड़े हाथियों ने ज़ोर से चिंघाड़ मारी, जिससे पूरा जंगल गूंज उठा। शिकारी डर के मारे अपना जाल और हथियार वहीं छोड़कर भाग गया!
मुन्ना और उसके दोस्तों ने छोटू हिरण को सुरक्षित बाहर निकाला। हिरण डर से कांप रहा था, लेकिन वह मुन्ना को देखकर मुस्कुरा पड़ा।
अध्याय 6: नन्हा, लेकिन सबसे बहादुर!
जब सब कुछ ठीक हो गया, तो जंगल के सभी जानवर मुन्ना के चारों ओर इकट्ठा हो गए। चिंकी उछलकर बोला, “देखो-देखो, हमारा मुन्ना सबसे बहादुर है!”
मुन्ना थोड़ा शर्मिंदा हो गया, लेकिन बड़े हाथी भी उसकी तारीफ करने लगे।
उसके झुंड के सबसे बड़े हाथी बड़का दादा ने कहा, “मुन्ना, आज तुमने साबित कर दिया कि सच्ची बहादुरी ताकत से नहीं, बल्कि दिल से आती है।”
मुन्ना खुशी से कूद पड़ा। अब वह नन्हा जरूर था, लेकिन पूरे जंगल का हीरो बन गया था!
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