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चाँदनी में फिसलती यादें – प्यार, ख़तरों और नियति की कहानी

Title: चाँदनी में फिसलती यादें – प्यार, ख़तरों और नियति की कहानी

Meta Description: तीन दिलों की दास्ताँ, जहाँ प्यार, ख़तरा और जुनून एक साथ टकराते हैं। क्या उनका प्यार इस तूफ़ान से बच पाएगा? पढ़िए यह रोमांचक प्रेम कहानी!


अध्याय 1: मुलाक़ात

इटली के वेरोना शहर की पत्थरों वाली गलियों में मूसलाधार बारिश हो रही थी। इसाबेला रोसी अपने वायलिन केस को कसकर पकड़े तेज़ कदमों से भाग रही थी। उसके गीले बाल उसके गुलाबी गालों से चिपक गए थे। उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था—सिर्फ़ ठंड से नहीं, बल्कि डर से भी।

उसने उसे फिर देख लिया था।

लुका मोरेटी, वह शख़्स जिसने सालों से उसके सपनों को घेर रखा था, सड़क के उस पार खड़ा था। उसकी तीखी हरी आँखें इसाबेला से टकराईं और फिर अँधेरे में गुम हो गईं। लेकिन लुका तो मर चुका था… है ना?

अचानक एक हाथ ने उसकी कलाई पकड़कर उसे एक अँधेरी गली में खींच लिया। इसाबेला ने चीख़ने को मुँह खोला—लेकिन फिर उसने उस ख़ास खुशबू को पहचान लिया। चंदन और ख़तरे की।

“लुका,” उसने फुसफुसाया, उसकी आवाज़ काँप रही थी।

“तुम्हें यहाँ नहीं होना चाहिए, बेला,” उसने गुर्राते हुए कहा, उसकी आवाज़ में गुस्सा और चिंता थी। “वे तुम्हें देख रहे हैं।”

इससे पहले कि वह कुछ कह पाती, एक गोली की आवाज़ गली में गूँजी। लुका ने उसे अपने पीछे खींचकर पिस्तौल निकाली।

“भागो!” उसने आदेश दिया।

लेकिन इसाबेला अब पाँच साल पहले की वह डरी हुई लड़की नहीं थी जो वेरोना से भाग गई थी। उसने उसकी बाँह पकड़ ली। “तुम्हारे बिना नहीं।”

उनकी नज़रें मिलीं—सालों का अनकहा प्यार, धोखा, और यादों का तूफ़ान उनके बीच बहने लगा।

तभी, अँधेरे से एक और शख़्स निकला—लंबा, चौड़े कंधों वाला, बर्फ़ीली नीली आँखों वाला।

“काफ़ी देर कर दी, मोरेटी,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।

इसाबेला की साँस अटक गई। गैब्रियल।

उसका पूर्व मंगेतर। वह शख़्स जिसने उसे धोखा दिया था। वह शख़्स जिसने लुका को मारने की कोशिश की थी।

और अब, वह वापस आ गया था।


अध्याय 2: वह अतीत जो सताता है

पाँच साल पहले, इसाबेला की सगाई गैब्रियल डी लुका से हुई थी—एक अमीर बिजनेसमैन जिसके प्यारे चेहरे के पीछे एक गहरा राज़ छुपा था। वह एक माफिया परिवार का वारिस था।

लुका, उसका बचपन का प्यार, उसका रक्षक, उसका सबसे अच्छा दोस्त—जिस रात उसे मर्डर के झूठे आरोप में फँसाकर गायब कर दिया गया, उस रात इसाबेला ने सोचा वह मर चुका है।

लेकिन अब, उन दोनों के बीच खड़ी होकर, इसाबेला को सच समझ में आया—लुका ने उसे बचाने के लिए अपनी मौत का नाटक किया था। और गैब्रियल ने यह सब प्लान किया था।

“तुमने मुझसे झूठ बोला,” उसने फुसफुसाया, आँखों में आँसू।

गैब्रियल मुस्कुराया। “और फिर भी, तुमने मुझे चाहा।”

लुका आगे बढ़ा, उसका जबड़ा तन गया। “आज रात यह ख़त्म होगा।”

हवा में तनाव था। बारिश, लुका के हाथ में पिस्तौल, गैब्रियल की नज़रें—इसाबेला जानती थी कि यह सिर्फ़ ज़िंदगी-मौत की लड़ाई नहीं थी।

यह उसके दिल की लड़ाई थी।


अध्याय 3: ख़तरनाक नाच

वे तीनों एक जानलेवा खेल में फँस चुके थे—गैब्रियल इसाबेला को वापस चाहता था, लुका बदला लेना चाहता था, और इसाबेला… वह सिर्फ़ सच जानना चाहती थी।

जैसे-जैसे वे वेरोना की अंडरवर्ल्ड में भागते रहे, हत्यारों से बचते हुए राज़ उजागर करते रहे, इसाबेला खुद को दो प्यारों के बीच फँसा पा रही थी।

लुका बेख़ौफ़ था, जुनूनी, उसके लिए मरने को तैयार।

गैब्रियल चालाक था, मालिकाना अंदाज़ वाला, उसके लिए किसी को भी मारने को तैयार।

और वह? वह भागने से थक चुकी थी।

एक तूफ़ानी रात, जब लुका ने उसके घाव पर पट्टी बाँधी, उसका स्पर्श देर तक रहा।

“मैंने तुम्हें कभी भुलाया नहीं,” उसने कहा, आवाज़ भावुक।

इसाबेला का दिल दुखा। “तो फिर तुमने मुझे छोड़ क्यों दिया?”

“क्योंकि मैं चाहता था कि तुम मुझसे नफ़रत करके जीओ, न कि मुझसे प्यार करके मरो।”

आँसू छलक पड़े। उसने उसे चूम लिया—एक भूखा, बेसब्र, पाँच साल के इंतज़ार का चुंबन।

लेकिन तभी गैब्रियल की आवाज़ काटकर आई—

“बहुत प्यारा।”

वे मुड़े तो देखा—वह दरवाज़े पर खड़ा था, हाथ में पिस्तौल।

“वक्त आ गया है, बेला,” उसने ठंडे स्वर में कहा। “वह या मैं?”


अध्याय 4: आख़िरी मुक़ाबला

एक सुनसान ओपेरा हाउस उनका मैदान-ए-जंग बना। गैब्रियल के आदमियों ने उन्हें घेर लिया।

इसाबेला लुका और गैब्रियल के बीच खड़ी थी, दिल धड़क रहा था।

“उसे जाने दो,” लुका ने गुर्राया।

गैब्रियल हँसा। “वह कभी तुम्हारी नहीं थी।”

एक गोली चली।

इसाबेला चीख़ पड़ी जब लुका गिरा, ख़ून से उसकी शर्ट भीग गई।

“नहीं!” वह उसके पास गिरकर घाव को दबाने लगी।

गैब्रियल नज़दीक आया। “ऐसा होना ज़रूरी नहीं था।”

लेकिन तभी—लुका हिला!

एक झटके में उसने गैब्रियल को निहत्था कर दिया।

“बेला,” लुका ने हाँफते हुए कहा। “भाग जाओ!”

लेकिन वह नहीं भागी। उसने पिस्तौल उठाई।

और पहली बार, उसने जवाब दिया।


समापन: तूफ़ान के बाद प्यार

अधिकारियों ने गैब्रियल और उसके आदमियों को गिरफ़्तार कर लिया। लुका बाल-बाल बचा।

जब तक वह ठीक नहीं हुआ, इसाबेला ने उसका साथ नहीं छोड़ा।

एक शाम, चाँदनी में, उसने उसका हाथ पकड़ा।

“मुझसे शादी करो,” उसने फुसफुसाया।

वह मुस्कुराई, आँसुओं के बीच। “इतनी देर क्यों लगाई?”

और जैसे ही उनके होंठ मिले, अतीत धुंधला गया—बचा सिर्फ़ प्यार, उम्मीद, और सितारों में लिखा भविष्य।

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